निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी

महा-अनुष्ठान 2026
साल की सबसे बड़ी, सबसे दुर्लभ और सबसे फलदायी एकादशी

Price range: ₹2,300.00 through ₹5,000.00

🕉️ Vedic Temple Puja प्रस्तुत करता है

निर्जला एकादशी
महा-अनुष्ठान 2026

साल की सबसे बड़ी, सबसे दुर्लभ और सबसे फलदायी एकादशी

इस निर्जला एकादशी, क्या आपके नाम से काशी के पावन अस्सी घाट पर होगी विशेष पूजा? अक्सर हम घर पर एकादशी का व्रत तो रख लेते हैं, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में पूरे नियमों के साथ शास्त्रीय अनुष्ठान करना असंभव हो जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए Vedic Temple Puja लेकर आया है एक दिव्य अवसर।

📅 25 जून 2026
📍 लक्ष्मी नारायण मंदिर, अस्सी, वाराणसी
👤 1-on-1 Dedicated Pandit

⚡ क्या आप जानते हैं कि साल की सबसे बड़ी एकादशी का व्रत रखने से यमराज के दूत आपके पास नहीं आते? जानिए इसका पौराणिक, वैज्ञानिक सच और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से सीधे इस महा-पूजा से जुड़ने का प्रामाणिक तरीका!

निर्जला एकादशी क्या है और इसे
महा-व्रत क्यों कहते हैं? 🙏

सनातन धर्म में सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं और इस साल 2026 में अधिकमास होने के कारण कुल 26 एकादशियां हैं। इन सभी में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ, फलदायी और कठिन माना गया है।

इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न और जल की एक बूंद का भी त्याग करना होता है।

📖 शास्त्रों में वर्णित है कि यदि कोई व्यक्ति पूरे साल की एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता है, तो वह केवल इस एक दिन निर्जल रहकर व्रत कर ले, तो उसे साल की सभी 26 एकादशियों का पूरा पुण्य एक साथ मिल जाता है।

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निर्जल व्रत — सर्वाधिक तपस्या

सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक — न अन्न, न जल की एक बूंद। यही इसे सबसे कठिन और सबसे फलदायी बनाता है।

🏆

26 एकादशियों का पुण्य एक दिन में

इस एक व्रत से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का संपूर्ण पुण्य एक साथ प्राप्त होता है — यह शास्त्रों का वचन है।

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वैकुंठ धाम की प्राप्ति

इस महा-व्रत को पूरी निष्ठा से करने पर सीधे भगवान विष्णु के धाम — वैकुंठ — की प्राप्ति होती है।

महाभारत काल की अमर कथा —
क्यों इसे भीमसेनी एकादशी कहते हैं? 🏹

📜 भीमसेन, महर्षि वेदव्यास और मोक्ष की राह

महाभारत काल में कुंती पुत्र भीमसेन को छोड़कर बाकी सभी पांडव — युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और माता द्रौपदी — हर एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रखते थे। लेकिन भीमसेन के पेट में "वृक" नाम की एक अत्यधिक तीव्र भूख बढ़ाने वाली जठराग्नि थी। इस वजह से वे चाहकर भी भूखे नहीं रह पाते थे।

वे जब भी अपने परिवार को व्रत करते देखते, तो उन्हें बहुत आत्मग्लानि होती थी कि वे भगवान विष्णु की भक्ति नहीं कर पा रहे हैं।

अपनी इस व्यथा को लेकर भीम महर्षि वेदव्यास के पास गए और रोते हुए बोले —

🌸 हे परम पूज्य गुरुदेव! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी का उपवास रखते हैं और मुझसे भी व्रत रखने को कहते हैं। परंतु मैं अपनी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाता। क्या भूखे न रहने के कारण मुझे कभी मोक्ष नहीं मिलेगा? कृपया मुझे कोई ऐसा सुलभ उपाय बताएं जिससे मैं नरक की यातनाओं से बच सकूं। 🌸

तब महर्षि वेदव्यास ने मुस्कुराते हुए भीम को ढाँढस बंधाया और कहा —

🌸 हे भीम! व्याकुल मत हो। शास्त्रों में हर समस्या का समाधान है। तुम पूरे वर्ष में केवल एक बार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बिना अन्न और बिना जल (निर्जल) के व्रत रखो। इस भीषण गर्मी में पानी का त्याग करना अत्यंत कठिन तपस्या है। यदि तुम यह एक व्रत पूरी निष्ठा से कर लोगे, तो तुम्हें सालभर की सभी एकादशियों का फल एक ही दिन में मिल जाएगा और तुम्हें सीधे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होगी। 🌸

भीमसेन ने गुरु की आज्ञा मानकर अत्यंत कड़े परिश्रम और इच्छाशक्ति से इस व्रत को पूर्ण किया। इसी कारण इस पावन तिथि को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। 🙏

एकादशी के दिन चावल खाना महापाप क्यों है? —
जानिए 2 मुख्य कारण 🔱

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि एकादशी के दिन घर में चावल बनाना या खाना पूरी तरह वर्जित क्यों है? इसके पीछे दो बेहद ठोस कारण हैं:

🔱 पौराणिक कारण — महर्षि मेधा की कथा

कथा के अनुसार, एक बार महर्षि मेधा ने मां दुर्गा के क्रोध से बचने के लिए अपने योग बल से शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी के भीतर समा गया। बाद में, उसी स्थान पर पृथ्वी से जौ और चावल के पौधे उत्पन्न हुए।

शास्त्रों के अनुसार, चावल को महर्षि मेधा का ही रूप माना गया है, जिसमें जीव तत्व मौजूद होता है। चूंकि एकादशी का दिन पूर्ण सात्विकता और अहिंसा का दिन है, इसलिए इस दिन चावल खाना किसी जीव के मांस भक्षण के समान माना गया है।

🌙 वैज्ञानिक कारण — चंद्रमा और जल तत्व का प्रभाव

वैज्ञानिक दृष्टि से, चावल में जल को सोखने की क्षमता सबसे अधिक होती है। एकादशी के दिन ब्रह्मांड में चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि वह पृथ्वी पर मौजूद जल तत्वों को तीव्रता से अपनी ओर आकर्षित करता है।

चूंकि मनुष्य के शरीर में भी लगभग 70% पानी होता है और हमारे मन का कारक चंद्रमा है — यदि हम इस दिन चावल खाते हैं, तो शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है। इससे हमारा मन विचलित, अशांत और तामसिक प्रवृत्तियों की ओर आकर्षित होता है, जिससे व्रत और ध्यान साधना खंडित हो जाती है।

तुलसी माता का गुप्त नियम 🌿 —
एकादशी पर भूलकर भी न करें यह गलती!

भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) के कभी पूरी नहीं मानी जाती। लेकिन एकादशी के दिन तुलसी माता से जुड़ा एक ऐसा कड़ा नियम है, जिसे न जानने पर आपकी पूरी पूजा निष्फल हो सकती है:

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माता तुलसी का निर्जल व्रत

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन माता तुलसी स्वयं भगवान विष्णु के लिए निर्जल उपवास रखती हैं। इस दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाने से उनका व्रत खंडित होता है। साथ ही, इस दिन तुलसी का पत्ता तोड़ना उन्हें अत्यधिक कष्ट देता है।

✅ सरल समाधान: यदि आपको एकादशी की पूजा के लिए तुलसी के पत्तों की आवश्यकता है, तो उन्हें एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लें। तुलसी के पत्ते कभी बासी नहीं होते — वे कई दिनों तक शुद्ध माने जाते हैं। 🙏

एकादशी व्रत का आधुनिक विज्ञान 🏆 —
नोबेल प्राइज और ऑटोफैगी कनेक्शन!

सनातन धर्म के ऋषियों ने हजारों साल पहले जो नियम बनाए, आधुनिक विज्ञान आज उनके सामने सिर झुक रहा है:

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ऑटोफैगी (Autophagy) — Nobel Prize 2016 जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओशुमी | चिकित्सा विज्ञान का सर्वोच्च सम्मान

वर्ष 2016 में जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओशुमी को ऑटोफैगी प्रक्रिया की खोज के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया। इस वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार —

जब मानव शरीर 20 से 24 घंटे तक पूरी तरह उपवास पर रहता है, तो शरीर के अंदर एक अद्भुत सफाई प्रक्रिया शुरू होती है। शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं अंदर मौजूद मृत कोशिकाओं, ट्यूमर, कचरे और कैंसर पैदा करने वाले हानिकारक तत्वों को खुद ही खाना और साफ करना शुरू कर देती हैं।

निर्जला उपवास कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बचने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक तरीका है। ऋषियों की यह विज्ञान हजारों वर्ष पुरानी है!

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वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric Pressure): एकादशी के दिन पृथ्वी पर वायु का दबाव बहुत कम होता है। इस समय यदि पेट खाली रहे, तो शरीर के आंतरिक अंगों — पाचन तंत्र, लिवर, किडनी — को हील होने के लिए सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है।

वाराणसी (अस्सी घाट) में महा-पूजा का महत्व 🏛️ —
मुमुक्षु भवन की असीम ऊर्जा

🏛️ स्थान: लक्ष्मी नारायण मंदिर

📍 मुमुक्षु भवन, अस्सी, वाराणसी — बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी

यह संपूर्ण अनुष्ठान बाबा विश्वनाथ की प्रिय नगरी काशी के एक अत्यंत प्राचीन और जागृत केंद्र में संपन्न होगा। काशी को शास्त्रों में वो परम पावन क्षेत्र माना गया है जहाँ भगवान की अलौकिक दिव्य ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती है।

अस्सी घाट के समीप स्थित मुमुक्षु भवन की भूमि अपने आप में ही आध्यात्मिक शांति और तपस्या का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, इस जागृत और दिव्य ऊर्जा क्षेत्र में जब कोई विद्वान ब्राह्मण आपके लिए तपस्या, जप और पाठ करता है, तो उसका पूर्ण शुभ फल आपको मिलता है।

इस निर्जला एकादशी पर, यदि आप स्वयं वाराणसी नहीं आ सकते, तो हम तकनीक के माध्यम से आपको इस परम पवित्र माध्यम से जोड़ेंगे। 🙏

हर यजमान के लिए एक अलग,
समर्पित पंडित जी! 👤

🙏 सामूहिक नहीं — एक विशिष्ट, समर्पित पंडित केवल आपके लिए

आजकल "ऑनलाइन पूजा" के नाम पर एक ही पंडित जी एक साथ सैकड़ों-हजारों लोगों के नाम एक पर्चे पर लिखकर पढ़ देते हैं। वैदिक विज्ञान स्पष्ट कहता है — मंत्र-शक्ति तरंगों की तरह काम करती है। जब एक ब्राह्मण केवल एक यजमान के लिए एकाग्र होकर संकल्प लेता है, तो उस मंत्र का फल सीधे उसी यजमान को मिलता है।

सामूहिक पूजा में वह दिव्य ऊर्जा सैकड़ों हिस्सों में बँट जाती है — और आपको जो मिलता है वह नगण्य होता है।

✅ Vedic Temple Puja का समाधान — 1-on-1 Dedicated Pandit System

हम किसी भी प्रकार की सामूहिक या भीड़ वाली पूजा का आयोजन नहीं कर रहे हैं। इस महा-अनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आप जो भी स्लॉट या पैकेज बुक करेंगे, आपके लिए काशी की पावन भूमि पर एक विशिष्ट, विद्वान और वेदमूर्ति ब्राह्मण (पंडित जी) को पूरी तरह नियुक्त किया जाएगा।

वे पंडित जी केवल आपके और आपके परिवार के नाम-गोत्र का संकल्प हाथ में जल लेकर करेंगे। पूजा के आरंभ से लेकर पूर्णता तक, वे केवल आपके कल्याण, आपके स्वास्थ्य और आपकी मनोकामना पूर्ति के लिए मंत्रों का जप करेंगे।

आपके समर्पित पंडित जी आपके लिए
कौन-से 4 महा-कार्य करेंगे? 🙏

जब आपके व्यक्तिगत पंडित जी आसन पर बैठेंगे, तो वे शास्त्रों के कड़े नियमों का पालन करते हुए आपके लिए निम्नलिखित चार अत्यंत शक्तिशाली शास्त्रीय अनुष्ठान संपन्न करेंगे:

📿

📿 1008 विष्णु सहस्रनाम का संपूर्ण संपुट पाठ

सामान्यतः सामूहिक पूजा में विष्णु सहस्रनाम का पाठ एक बार सामूहिक रूप से लाउडस्पीकर पर कर दिया जाता है। लेकिन यहाँ, आपके व्यक्तिगत पंडित जी अकेले बैठकर भगवान विष्णु के 1000 महा-मंत्रों का 1008 बार विशेष संपुट के साथ व्यक्तिगत रूप से पाठ करेंगे।

महा-लाभ: यह प्रक्रिया आपके जीवन से भारी से भारी कर्ज, अदालती और कानूनी मामले, और शरीर की पुरानी से पुरानी बीमारियों को जड़ से मिटाने के लिए अचूक मानी जाती है। इससे कुंडली के राहु-केतु और पितृ दोष शांत होते हैं।
🌿

🌿 भगवान नारायण को 108 तुलसी पत्र अर्पण (नाम अर्चना)

भगवान विष्णु को तुलसी माता अत्यंत प्रिय हैं। आपके पंडित जी भगवान विष्णु के दिव्य नामों का उच्चारण करते हुए, एक-एक करके कुल 108 शुद्ध और पवित्र तुलसी दल साक्षात् नारायण के चरणों में आपके नाम से अर्पित करेंगे।

महा-लाभ: एकादशी के दिन भगवान को 108 तुलसी पत्र व्यक्तिगत रूप से चढ़ाने से साक्षात् माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इससे आपके घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और व्यापार-नौकरी में दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की मिलती है।
📖

📖 श्री सत्यनारायण महापाठ और कथा श्रवण

अनुष्ठान के उत्तरार्ध में, आपके पंडित जी भगवान सत्यनारायण की अमर और कल्याणकारी व्रत कथा का सस्वर वाचन करेंगे।

महा-लाभ: यह पाठ आपके परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम को बढ़ाता है, घर के वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेता है, तथा परिवार के किसी भी सदस्य पर आने वाले अकाल मृत्यु के संकट को टाल देता है।
🏺

🏺 महाप्रसाद वितरण और फल दान — आपकी तरफ से

निर्जला एकादशी के दिन ज्येष्ठ मास की भयंकर गर्मी होती है। इस दिन पानी और शीतलता का दान सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। अनुष्ठान की समाप्ति पर, आपकी पूजा को संपूर्णता देने के लिए, आपकी तरफ से वाराणसी के उसी जागृत मंदिर के बाहर जरूरतमंदों, राहगीरों और साधु-संतों को जल से भरे मिट्टी के नए घड़े, हाथ से झलने वाले पंखे और मौसमी फल जैसे आम और तरबूज बांटे जाएंगे।

इसका पूरा पुण्य सीधे आपके खाते में जुड़ेगा। काशी में किया गया दान हजारों गुना फल देता है।

प्राण-प्रतिष्ठित एवं जागृत तुलसी माला का रहस्य 🌿 —
लाभ, नियम और विज्ञान

हमारे विशेष पूजा में यजमानों को वह पावन तुलसी माला भेजी जा रही है जिससे विद्वान पंडित जी ने स्वयं आपके नाम से अनुष्ठान के दौरान मंत्र जप किया है। यह माला साक्षात् दिव्य तरंगों से आवेशित (जागृत) होती है।

🌿 सनातन धर्म के अनुसार तुलसी माला धारण करने के महान लाभ
🛡️
अकाल मृत्यु से रक्षा

शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति गले में तुलसी की माला धारण करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। यमराज के दूत ऐसे व्यक्ति के समीप नहीं आते।

आत्मा और मन की शुद्धि

यह व्यक्ति की आत्मा और शरीर को सात्विक बनाए रखती है, जिससे मन में बुरे विचार या तामसिक प्रवृत्तियां उत्पन्न नहीं होतीं।

विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा

विज्ञान के अनुसार, तुलसी की लकड़ी में Electro-magnetic Energy होती है। जब यह लगातार कंठ और त्वचा के संपर्क में रहती है, तो शरीर के नर्वस सिस्टम को शांत करती है।

🧠
फोकस और मेंटल हेल्थ

मानसिक तनाव और एंग्जायटी तेजी से कम होती है। मस्तिष्क में अल्फा तरंगें बढ़ती हैं — एकाग्रता और निर्णय क्षमता में जबरदस्त सुधार।

❤️
Blood Pressure नियंत्रण

रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित रखने में यह काफी मददगार पाई गई है — आधुनिक वैज्ञानिक शोध द्वारा प्रमाणित।

⚠️ तुलसी माला पहनने के कड़े नियम — इन्हें जरूर पढ़ें:

यदि आप तुलसी माला धारण करते हैं, तो आपको पूरी तरह सात्विक जीवन शैली अपनानी होगी। लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
यदि किसी कारणवश आपको तामसिक भोजन करना पड़े या ऐसी जगहों पर जाना पड़े जहाँ शुद्धता न हो, तो माला को उतारकर पूजा घर में रख दें और पुनः स्नान करके ही इसे धारण करें।

निर्जला एकादशी महा-अनुष्ठान —
अपनी श्रद्धा के अनुसार चुनें 🙏

भक्तों की सुविधा और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इस महा-अनुष्ठान को तीन विशेष श्रेणियों में विभाजित किया गया है। आप अपनी श्रद्धा अनुसार किसी भी एक दिव्य श्रेणि का चयन कर सकते हैं:

🪔
श्री विष्णु कृपा संकल्प
₹ 2,300
  • आपके नाम और गोत्र से संपूर्ण व्यक्तिगत पूजा और मंत्र जाप संपन्न किया जाएगा।
  • अनुष्ठान के बाद, वह जागृत और प्राण-प्रतिष्ठित तुलसी माला (जिससे पंडित जी ने आपके नाम का जप किया है) सीधे कूरियर के माध्यम से आपके घर भेज दी जाएगी।
  • संकल्प लेते हुए का Video और संपूर्ण पूजा का Video — WhatsApp पर भेजा जाएगा।
  • डिजिटल संकल्प रसीद और पंडित जी की जानकारी।
📞 अभी बुक करें — WhatsApp करें
👑
वैकुंठ धाम महा-कल्याण सेवा
₹ 5,000
👑 सर्वश्रेष्ठ
  • यह सबसे विशेष और संपूर्ण फल देने वाली महा-सेवा है। इसमें आपकी पूजा और प्रसाद तो शामिल है ही।
  • आपकी तरफ से काशी की पावन भूमि पर पूर्ण दान कार्य: मिट्टी का नया घड़ा (कलश), मौसमी फल, छाता और चप्पलें — जरूरतमंदों और साधु-संतों को सीधे दान।
  • दान का लाइव फोटो और वीडियो प्रमाण आपके WhatsApp पर तुरंत।
  • विशेष महाप्रसाद + पंडित जी द्वारा जप की गई प्राण-प्रतिष्ठित तुलसी माला आपके घर भेजी जाएगी।
🙏 सर्वश्रेष्ठ महा-सेवा बुक करें

100% पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया 📱 —
पूजा का Video और दान का प्रमाण — WhatsApp पर!

आपको वाराणसी आने की कोई आवश्यकता नहीं है। संकल्प लेते हुए का वीडियो और संपूर्ण पूजा का Video आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा। मात्र 4 आसान कदम:

1

📝 बुकिंग फॉर्म भरें

नीचे दिए गए बुकिंग फॉर्म में अपना नाम, गोत्र, परिवार के सदस्यों के नाम और अपनी मुख्य मनोकामना (जैसे — व्यापार वृद्धि, रोग मुक्ति, संतान सुख आदि) लिखें।

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📲 डिजिटल संकल्प रसीद प्राप्त करें

बुकिंग सफल होने पर आपको व्हाट्सएप और ईमेल पर आपकी डिजिटल संकल्प रसीद और आपके कस्टमाइज्ड पंडित जी की जानकारी भेजी जाएगी।

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🎥 पूजा का Video — 25 जून 2026

25 जून 2026 (निर्जला एकादशी) के शुभ मुहूर्त पर पंडित जी आपका नाम-गोत्र सस्वर बोलकर पूजा का संकल्प लेंगे — संकल्प लेते हुए का वीडियो, संपूर्ण पाठ और दान तक की पूरी पूजा का Video आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।

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📦 प्रसाद आपके घर पहुँचेगा

मुख्य सूखा महाप्रसाद और आपकी चुनी हुई सेवा के अनुसार सामग्री — कूरियर द्वारा आपके घर के पते पर सुरक्षित भेज दी जाएगी। Tracking ID WhatsApp पर मिलेगी।

ब्राह्मणों की संख्या निश्चित है —
सीटें अत्यंत सीमित हैं!

चूंकि यह कोई सामूहिक पूजा नहीं है और हम प्रत्येक यजमान को एक अलग और समर्पित पंडित जी प्रदान कर रहे हैं, इसलिए हमारे पास पंडितों की संख्या पूरी तरह निश्चित और सीमित है। जैसे ही हमारे योग्य ब्राह्मणों के स्लॉट फुल हो जाएंगे, इस महा-अनुष्ठान के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। अपने परिवार के कल्याण, अखंड लक्ष्मी की कृपा और जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति के लिए अभी निर्णय लें।

💬 अभी WhatsApp करें: 9773922398

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 🙏

🙏 क्या सच में मेरे लिए अलग पंडित जी होंगे?
जी हां, शत-प्रतिशत। Vedic Temple Puja अपनी सत्यता और प्रामाणिकता के लिए जाना जाता है। आपके पंडित जी केवल आपका संकल्प लेकर अकेले बैठेंगे — यह कोई ग्रुप एक्टिविटी नहीं है। पूजा का संपूर्ण Video — संकल्प से लेकर आरती तक — आपके WhatsApp पर भेजा जाएगा।
🤔 मुझे अपना गोत्र नहीं पता, तो क्या मैं बुकिंग कर सकता हूँ?
बिल्कुल! यदि आपको अपना गोत्र ज्ञात नहीं है, तो संकल्प के समय पंडित जी 'कश्यप' गोत्र का उच्चारण करेंगे, जिसे शास्त्रों में ऋषि परंपरा के अनुसार सर्वमान्य और अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसमें कोई समस्या नहीं है।
📱 क्या पूजा के समय मुझे फोन के सामने बैठना होगा?
आवश्यक नहीं है। ब्राह्मण आपके प्रतिनिधि बनकर आपके नाम की तपस्या कर रहे हैं। आप अपने नियमित कार्य करते हुए या हमारे व्हाट्सएप व यूट्यूब लाइव लिंक के माध्यम से अपनी सुविधानुसार इस अनुष्ठान का पूरा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
🌺 यदि कोई महिला पीरियड्स (मासिक धर्म) में हो, तो क्या उसके नाम से यह पूजा हो सकती है?
जी हाँ, बिल्कुल हो सकती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि यजमान स्वयं अशुद्ध अवस्था में है, तो उनके प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त पंडित जी पूरी शुद्धता और कड़े नियमों के साथ यह अनुष्ठान संपन्न करते हैं। भक्त को घर बैठे पूजा का Video WhatsApp पर देख सकते हैं, जिससे पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है।
👨‍👩‍👧‍👦 क्या इस पूजा का संकल्प परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक साथ लिया जा सकता है?
जी हाँ, आप बुकिंग फॉर्म में अपने साथ अपने परिवार के सदस्यों के नाम और गोत्र भी दर्ज कर सकते हैं। आपके समर्पित पंडित जी संकल्प लेते समय परिवार के सभी सदस्यों के नामों का सस्वर उच्चारण करेंगे, जिससे पूरे परिवार को इसका लाभ मिले।
💧 निर्जला एकादशी का व्रत बहुत कठिन है, यदि मैं पानी पी लूँ तो क्या पूजा निष्फल हो जाएगी?
यदि आप शारीरिक कमजोरी या बीमारी के कारण निर्जल व्रत नहीं रख सकते, तो आप फलाहार या जलीय व्रत रख सकते हैं। आपकी तरफ़ से काशी के लक्ष्मी नारायण मंदिर में पंडित जी पूरी निष्ठा से मुख्य पाठ और तपस्या कर रहे हैं, इसलिए आपके व्रत के स्वरूप से इस अनुष्ठान के फल पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
📦 पूजा संपन्न होने के बाद महाप्रसाद हमारे घर तक कितने दिनों में पहुँचेगा?
25 जून को अनुष्ठान संपन्न होने के अगले ही दिन काशी से आपका मुख्य सूखा महाप्रसाद स्पीड पोस्ट या कूरियर के जरिए रवाना कर दिया जाएगा। आमतौर पर भारत के किसी भी हिस्से में प्रसाद पहुँचने में 4 से 7 कार्यदिवस का समय लगता है। इसकी ट्रैकिंग आईडी आपको व्हाट्सएप पर दे दी जाएगी।
🎥 क्या इस व्यक्तिगत 1-on-1 पूजा के दौरान पंडित जी से सीधे बात करने का मौका मिलेगा?
पूजा के दौरान पंडित जी एकाग्र चित्त होकर मंत्र जाप और पाठ में लीन रहते हैं, इसलिए सीधे बात करना संभव नहीं होगा। लेकिन पूजा शुरू होने से ठीक पहले, जब वे आपका संकल्प ले रहे होंगे, तब आप उन्हें सीधे अपने नाम-गोत्र का उच्चारण करते हुए सुन और देख सकेंगे।
📸 इस अनुष्ठान में जो दान (घड़ा, पंखा, फल) मेरी तरफ़ से होगा, उसका प्रमाण मुझे कैसे मिलेगा?
Vedic Temple Puja पूरी पारदर्शिता में विश्वास रखता है। अनुष्ठान की समाप्ति पर जब वाराणसी के मुमुक्षु भवन और अस्सी क्षेत्र में आपकी तरफ़ से जरूरतमंदों को यह सामग्री बांटी जाएगी, तो उस वितरण की लाइव तस्वीरें और वीडियो फुटेज आपके व्हाट्सएप नंबर पर तुरंत साझा की जाएंगी।
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इस दिव्य पूजा में भाग लेने के लिए
अभी बुक करें 🙏

वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी का यह अवसर साल में केवल एक बार आता है। अपने परिवार के कल्याण, अखंड लक्ष्मी की कृपा और जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति के लिए — Vedic Temple Puja के साथ जुड़ें। कोई भीड़ नहीं होगी — सिर्फ आपकी भक्ति होगी।

📍 लक्ष्मी नारायण मंदिर, मुमुक्षु भवन, अस्सी, वाराणसी  |  📅 25 जून 2026

🔒 100% पारदर्शी | Live Streaming | प्रसाद घर तक