पितृ कृपा महातर्पण अनुष्ठान

पितृ कृपा महातर्पण अनुष्ठान

🛕 घर बैठे गोत्र से तर्पण का संकल्प

1,500.00

पूर्वजों की तिथि याद नहीं है? तो उनका श्राद्ध और तर्पण कब करें? पितृपक्ष आते ही कई परिवारों के मन में एक सवाल जरूर आता है जिस पूर्वज की मृत्यु की तिथि ही याद नहीं है, उनका श्राद्ध किस दिन करें?

दादा-दादी की तिथि याद नहीं रहती। नाना-नानी की तिथि भी कई बार पता नहीं होती। और उनसे पहले के पूर्वजों के बारे में तो परिवार के पास बहुत कम जानकारी होती है। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाया। इस बार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को है।

🙏 पितरों के लिए तर्पण क्यों किया जाता है?

हमारे शास्त्रों में पितरों के श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। तर्पण में जल अर्पित करके अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद किया जाता है। परंपरा के अनुसार इसमें जल के साथ तिल और कुश का भी प्रयोग किया जाता है। श्राद्ध में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है और इस अवसर पर ब्राह्मणों को भोजन भी करवाते हैं।

पितृपक्ष में यदि पितरों को तर्पण न मिले, तो घर में तरक्की रुकती है और पितृदोष लगता है। इसलिए पितृपक्ष में अपने पूर्वजों को याद करके उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा चली आ रही है।

🙏 जब तिथि याद न हो, तब क्या करें?

यही सर्वपितृ अमावस्या की खास बात है। अगर आपको अपने किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि मालूम नहीं है, तो इस दिन उनके लिए श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है। कई लोगों को अपने पूर्वजों का नाम, तिथि या परिवार की पुरानी जानकारी पूरी तरह याद नहीं होती। ऐसी स्थिति में जितनी जानकारी उपलब्ध हो, उसके आधार पर पंडित से सही विधि पूछकर अनुष्ठान कराया जा सकता है। इस दिन अपने ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों को श्रद्धा से याद करने की परंपरा है।

🙏 काशी के गंगा घाट से पितरों के लिए तर्पण

काशी का गंगा से बहुत पुराना धार्मिक संबंध है। गंगा किनारे श्राद्ध, तर्पण और पितृ कर्म करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। इसी कारण बहुत से लोग अपने पूर्वजों के लिए काशी में तर्पण करवाना चाहते हैं। लेकिन हर किसी के लिए काशी जाना संभव नहीं होता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए Vedic Temple Puja की ओर से इस सर्वपितृ अमावस्या पर काशी के पवित्र गंगा घाट से “पितृ-कृपा महातर्पण अनुष्ठान”कराया जा रहा है। आप घर बैठे अपने परिवार के नाम और गोत्र से संकल्प के माध्यम से इस अनुष्ठान में जुड़ सकते हैं।

🙏 अनुष्ठान में क्या कराया जाएगा?

आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर पितरों के लिए
गंगाजल से तर्पण
श्राद्ध
कुश और तिल से पितृ कर्म
ब्राह्मण भोज

कराया जाएगा।और सबसे जरूरी बात अनुष्ठान की पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो आपको WhatsApp पर भेजे जाएंगे। ताकि आप घर बैठे देख सकें कि काशी के गंगा घाट पर आपके परिवार के नाम और गोत्र से अनुष्ठान कैसे कराया गया।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. सर्वपितृ अमावस्या को ही तर्पण क्यों किया जाता है?

सर्वपितृ अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन है। धार्मिक मान्यता में यह उन पूर्वजों के लिए विशेष मानी जाती है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती। इसी कारण इस दिन ऐसे पितरों का भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है।

2. अगर मुझे अपने पूर्वज का नाम भी याद नहीं है तो?

जितनी जानकारी आपको मालूम है, उतनी बताएं। अगर नाम और तिथि दोनों की जानकारी नहीं है, तो अनुष्ठान कराने वाले पंडित को यह बात पहले बता दें। वे परंपरा के अनुसार संकल्प लेकर सही विधि से तर्पण करगे

3. क्या काशी जाना जरूरी है?

नहीं। Vedic Temple Puja के इस अनुष्ठान में आप घर बैठे नाम और गोत्र से संकल्प के माध्यम से जुड़ सकते हैं।

4. क्या महिलाएं भी अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध या तर्पण करवा सकती हैं?

इस विषय में अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग नियम मिलते हैं।इसलिए महिला सदस्य अपने परिवार की परंपरा के अनुसार अनुष्ठान करवा सकती हैं।

5 . तर्पण में तिल और कुश का क्या महत्व है?

तिल और कुश का प्रयोग पितृ कर्म की कई पारंपरिक विधियों में किया जाता है। इनका प्रयोग किस प्रकार और कितनी मात्रा में करना है, यह अनुष्ठान की विधि के अनुसार तय होता है।

6. क्या ब्राह्मण भोज भी कराया जाएगा?

हाँ। इस अनुष्ठान में पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण के साथ ब्राह्मण भोज भी कराया जाएगा।

7. पूजा के बाद हमें क्या मिलेगा?

अनुष्ठान से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो WhatsApp पर भेजे जाएंगे, ताकि आप घर बैठे अनुष्ठान की प्रक्रिया देख सकें।

8. ₹1500 की सेवा में क्या शामिल है?

Vedic Temple Puja के अनुसार इसमें आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और ब्राह्मण भोज कराया जाएगा।

इस बार अपने पूर्वजों को याद करें हमारे पास पुरानी पीढ़ियों की बहुत सारी यादें नहीं बचतीं। कई नाम भूल जाते हैं। कई तारीखें भी याद नहीं रहतीं। लेकिन अपने पूर्वजों को याद करने के लिए हर बात का याद होना जरूरी नहीं है। सर्वपितृ अमावस्या ऐसा ही एक अवसर है, जब हम अपने ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों को श्रद्धा से याद कर सकते हैं। इस बार 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को अपने पितरों के लिए तर्पण करवाएं। और अगर काशी जाना संभव नहीं है, तो Vedic Temple Puja के पितृ-कृपा महातर्पण अनुष्ठान से घर बैठे नाम और गोत्र के साथ जुड़ें। ₹1500 | काशी के गंगा घाट से |