- 📍 पवित्र गंगा घाट, काशी
- 🗓️ पितृपक्ष में पूरे 15 दिन, हर रोज़
पितृपक्ष
🛕 पितृपक्ष में अपने पितरों को दें काशी के गंगा जल से असली तृप्ति
₹1,500.00
- 🕉️🙏 1800+ श्रद्धालु इस पूजा में शामिल हो चुके हैं
🙏 प्रतिदिन तर्पण क्यों ज़रूरी माना गया है
Vedic Temple Puja की तरफ से एक साफ वादा
कोई सामूहिक पूजा नहीं होती। आपके पूर्वजों का नाम और गोत्र लेकर, सिर्फ आपके परिवार के लिए अलग से तर्पण किया जाता है।तर्पण पूरा होते ही उसका ऑडियो या वीडियो प्रमाण आपके WhatsApp पर भेज दिया जाता है, जिसमें नाम-गोत्र का उच्चारण साफ सुनाई देता है। चाहें तो निर्धारित समय पर काशी के गंगा घाट से लाइव भी देख सकते हैं।
पितृपक्ष क्या है?
अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का समय। इन 15 दिनों में पितरों के नाम से अन्न-जल अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
पितृदोष क्या होता है?
शास्त्रों के अनुसार जब पितरों से जुड़े कर्म पूरे नहीं हो पाते, तो जीवन में रुकावटें आने लगती हैं, घर में अशांति रहती है और मानसिक तनाव बढ़ता है। इसी को पितृदोष कहा जाता है।
श्राद्ध और तर्पण में फर्क
श्राद्ध में श्रद्धापूर्वक अन्न, वस्त्र और दान अर्पित किया जाता है। तर्पण में नाम-गोत्र लेकर जल और गंगाजल से पितरों का स्मरण किया जाता है, जिससे उन्हें तुरंत तृप्ति मिलती है
रोज़ 15 दिन तर्पण क्यों?
एक दिन तर्पण करना और पूरे 15 दिन लगातार करना, इनमें बड़ा फर्क बताया गया है। मार्कण्डेय पुराण में पितरों को हर दिन अन्न-जल देने का विधान मिलता है, और गरुड़ पुराण के अनुसार निरंतर तर्पण से ही पितर पूरी तरह संतुष्ट होकर वंश को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
गंगाजल और काशी का महत्व
गंगा को मोक्षदायिनी माना गया है। काशी के गंगा घाट पर तर्पण करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि यहाँ माँ गंगा और मोक्ष क्षेत्र काशी, दोनों एक साथ मौजूद हैं।
क्या 15 दिन काशी जाना हर किसी के लिए मुमकिन है?
व्यस्त ज़िंदगी, समय की कमी या दूरी के कारण बहुत से परिवार चाहकर भी पूरे 15 दिन काशी में रहकर गंगा घाट पर तर्पण नहीं कर पाते। इसी वजह से Vedic Temple Puja यह सुविधा लेकर आया है।
घर बैठे काशी में 15 दिन का तर्पण संकल्प
आप घर बैठे ही अपने पूर्वजों के नाम-गोत्र से काशी के गंगा घाट पर पूरे 15 दिन का तर्पण करवा सकते हैं। हमारे आचार्य आपकी अनुपस्थिति में भी शास्त्रीय विधि से जल और गंगाजल अर्पित करेंगे।
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❓ पितृपक्ष और तर्पण से जुड़े सवाल
Q – यह तर्पण सामूहिक होगा या सिर्फ मेरे परिवार का?
A – पूरी तरह व्यक्तिगत। इसमें किसी अन्य परिवार का नाम शामिल नहीं होता। आचार्य केवल आपके पितरों के नाम-गोत्र से ही संकल्प लेते हैं।
Q – मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे नाम से तर्पण हुआ है?
A – तर्पण पूरा होते ही आपके WhatsApp पर नाम-गोत्र के उच्चारण का ऑडियो/वीडियो प्रमाण भेज दिया जाता है। चाहें तो लाइव स्ट्रीमिंग से भी जुड़ सकते हैं।
Q – क्या सिर्फ एक दिन के लिए भी संकल्प लिया जा सकता है?
A – हाँ, एक दिन भी संभव है। पर पूरे 15 दिन प्रतिदिन तर्पण करने का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है।
Q – तर्पण में नाम-गोत्र होना ज़रूरी क्यों है?
A – शास्त्रों के अनुसार नाम-गोत्र का उच्चारण करके दिया गया जल सीधे आपके पूर्वजों तक पहुँचता है।
Q – अगर गोत्र या पूर्वजों की पूरी जानकारी न हो तो?
A – ऐसी स्थिति में आचार्य गोत्र का उच्चारण करके शास्त्रीय विधि से पूजन पूरा करवाते हैं।
Q – क्या घर पर तर्पण करना काफी नहीं है?
A – घर पर तर्पण किया जा सकता है, लेकिन काशी के गंगा तट पर किए गए तर्पण का महत्व शास्त्रों में सबसे ऊपर माना गया है।
Q – बिना खुद काशी गए यह संकल्प मान्य होगा क्या?
A – बिल्कुल। जब आप नाम-गोत्र का संकल्प देकर आचार्य के माध्यम से पूजा करवाते हैं, तो उसका पूर्ण फल आपको और आपके पितरों को प्राप्त होता है।