महामृत्युंजय जप

महामृत्युंजय जप

🛕 सावन मे महामृत्युंजय मंत्र का पावन अनुष्ठान व्यक्तिगत संकल्प के साथ

753.00

यह सवा लाख महामंत्रों का अनुष्ठान सीधे काशी के उसी ऐतिहासिक महा मृत्युंजय मंदिर से कराया जाता है, जिसे लेकर मान्यता है कि वहां साक्षात शिव का वास है। जिंदगी में जब भी कोई अचानक बड़ी विपत्ति आ जाए, अकाल मृत्यु का डर सताए या कोई असाध्य बीमारी घेर ले, तब महामृत्युंजय अनुष्ठान ही संकट काटने का सबसे अचूक रास्ता माना जाता है। वैदिक टेम्पल पूजा के माध्यम से यह पूरा आयोजन काशी के मझे हुए विद्वान ब्राह्मण मिलकर संपन्न कराते हैं।

🔱 काशी महामृत्युंजय मंदिर में जप का विशेष महत्व क्यों है

🌟दस गुना फल की प्राप्ति: काशी के इस प्राचीन महामृत्युंजय मंदिर में की गई कोई भी पूजा या मंत्र जाप आम जगहों के मुकाबले सीधे दस गुना फल देता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ की दिव्य ऊर्जा मंत्रों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।

🌟अष्टभुजाधारी स्वरूप: इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ महादेव अपने अष्टभुजाधारी महामृत्युंजय रूप में विराजमान हैं, जिनके हाथों में अमृत कलश है। यही वजह है कि महामृत्युंजय अनुष्ठान के लिए इस पावन धाम को पूरी दुनिया में सबसे मुख्य माना गया है।

📿 महामृत्युंजय मंत्र जप क्यों है जरूरी

🌟जब कुंडली में राहु और केतु की महादशा परेशान करने लगे, तब अचानक एक्सीडेंट्स ,बीमारियां बढ़ने लगती हैं।
🌟शनि की साढ़ेसाती के कारण होने वाले भारी मानसिक तनाव और बिजनेस के बड़े नुकसान को रोकने के लिए यह बेहद जरूरी है।
🌟अगर कुंडली में मारकेश ग्रह की दशा चल रही हो या फिर कालसर्प दोष की वजह से बनते काम आखिरी वक्त पर बिगड़ रहे हों, तो यह मंत्र एक मजबूत कवच की तरह आपकी रक्षा करता है।

🌺 पौराणिक कथा और मंत्र का सीधा अर्थ

ऋषि मार्कंडेय की आयु बहुत छोटी थी। जब उनके प्राण लेने के लिए खुद यमराज धरती पर आए, तब उन्होंने शिवजी के इस गुप्त मंत्र का पाठ करना शुरू कर दिया। फिर क्या था, भगवान शिव खुद प्रकट हुए, यमराज से उनके प्राण बचाए और उन्हें हमेशा के लिए अमरता का वरदान दे दिया।

📿 जप की पूरी प्रक्रिया और व्यक्तिगत संकल्प

वैदिक टेम्पल पूजा के इस अनुष्ठान की सबसे अच्छी बात यही है कि भले ही इसमें और भी भक्त जुड़ते हैं, लेकिन फिर भी हर एक श्रद्धालु का व्यक्तिगत संकल्प पूरी विधि-विधान के साथ बिल्कुल अलग से कराया जाता है।

🌟व्यक्तिगत संकल्प: पूजा शुरू होते ही भाग लेने वाले हर एक भक्त का नाम, और गोत्र बोलकर उनका पर्सनल संकल्प अलग से लिया जाता है।
🌟अभिषेक: इसके ठीक बाद तांबे के पात्र से शिवलिंग का पंचामृत अभिषेक किया जाता है।
🌟सवा लाख जप: इसके बाद विद्वान ब्राह्मणों की पूरी टोली एक साथ बैठकर सवा लाख मंत्रों का संख्यात्मक जप शुरू करती है।
🌟हवन और आरती: तय दिनों में जब पूरा जप खत्म हो जाता है, तो दशांश हवन होता है और फिर महाप्रसाद का भोग लगाया जाता है।

✨ इस अनुष्ठान से जीवन में क्या बदलाव आते हैं

🌟बीमारियों से लड़ने की शरीर की ताकत बढ़ती है और सेहत में साफ सुधार दिखने लगता है।
🌟अकाल मृत्यु, किसी अनहोनी या दुर्घटना का डर मन से हमेशा के लिए निकल जाता है।
🌟मानसिक बेचैनी, डिप्रेशन और दिमाग में आने वाले उल्टे-सीधे विचारों से मुक्ति मिलती है।
🌟घर के अंदर की Negative Energy और हर तरह का वास्तु दोष शांत हो जाता है।
🌟काम-धंधे और नौकरी में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं और घर में बरकत आती है।

🎁 अनुष्ठान का महाप्रसाद और सिद्ध रुद्राक्ष

अनुष्ठान पूरी तरह संपन्न होने के बाद बाबा का विशेष महाप्रसाद आपके घर के पते पर भेजा जाता है। इस प्रसाद में बाबा की पावन भस्म और रक्षा सूत्र शामिल होता है, जिसे धारण करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

इस प्रसाद का सबसे मुख्य आकर्षण है अनुष्ठान और जप के दौरान साक्षात पूजित सिद्ध पांच मुखी रुद्राक्ष का दिव्य मनका। यह कोई साधारण रुद्राक्ष नहीं है, बल्कि सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों की गूंज और पूरी पूजा की सकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर समेटे हुए होता है, जो यजमान के लिए सबसे बड़ी सौगात है।

यह रुद्राक्ष शत-प्रतिशत असली और शुद्ध है, जिसे प्रमाणित करने के लिए इसके साथ गवर्नमेंट अप्रूव्ड लैब का ओरिजिनैलिटी सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। इस सर्टिफिकेट से यह पूरी तरह पक्का हो जाता है कि आपको मिला हुआ रुद्राक्ष एकदम प्राकृतिक और प्रामाणिक है।

इस अभिमंत्रित रुद्राक्ष को धारण करने के अनगिनत फायदे हैं। इसे गले में पहनने से मन का तनाव और घबराहट तुरंत शांत होती है। यह शरीर में ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करता है और दिल की सेहत को दुरुस्त रखता है। सबसे बड़ी बात, इसे पास रखने से हर तरह की नकारात्मक शक्तियों और नजर दोष से आपकी रक्षा होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप ही क्यों कराया जाता है?

जब कोई बहुत गंभीर बीमारी हो जिससे पीछा न छूट रहा हो, या अकाल मृत्यु का योग टालना हो और बड़े से बड़े संकटों से पार पाना हो, तब शास्त्रों में सवा लाख जप कराने का ही नियम बताया गया है।

क्या बीमार व्यक्ति की जगह परिवार का कोई दूसरा सदस्य संकल्प ले सकता है?

हां, बिल्कुल। अगर बीमार व्यक्ति खुद संकल्प लेने की स्थिति में नहीं है, तो उनके नाम और गोत्र का इस्तेमाल करके परिवार का कोई भी सदस्य इस अनुष्ठान को शुरू करवा सकता है।

काशी के महामृत्युंजय मंदिर का इतना नाम क्यों है?

यह मंदिर विशेष रूप से महामृत्युंजय भगवान का मुख्य धाम माना जाता है। मंदिर परिसर में स्थित धन्वंतरि कूप के बारे में मान्यता है कि आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि ने इसमें अपनी दिव्य औषधियां डाली थीं, जिससे इसका जल औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है। इसी कारण यहाँ किया गया अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माना जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र जप की दक्षिणा इतनी कम क्यों रखी गई है?

इस अनुष्ठान में 10 से 20 श्रद्धालुओं की पूजा विद्वान ब्राह्मण एक साथ संपन्न कराते हैं। इससे पूजा का खर्च सभी भक्तों में विभाजित हो जाता है। हालांकि, प्रत्येक श्रद्धालु का व्यक्तिगत संकल्प उनके अपने नाम और गोत्र से अलग-अलग लिया जाता है। इसी कारण इसकी दक्षिणा केवल ₹753 प्रति श्रद्धालु रखी गई है।

क्या ऑनलाइन पूजा का फल भी वैसा ही मिलता है जैसे वहां जाकर कराने पर मिले?

हां। भले ही आप काशी धाम में उपस्थित न हों, लेकिन विद्वान ब्राह्मण आपके नाम और गोत्र से व्यक्तिगत संकल्प लेकर पूजा संपन्न करते हैं। इसलिए पूजा के फल में कोई कमी नहीं आती।

पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद में क्या-क्या मिलता है?

पूजा संपन्न होने के बाद आपके घर भेजे जाने वाले महाप्रसाद में बाबा की भस्म, रक्षा सूत्र, गवर्नमेंट लैब सर्टिफाइड पंचमुखी रुद्राक्ष का अभिमंत्रित मनका तथा उसका ओरिजिनैलिटी सर्टिफिकेट शामिल होता है।

 

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अपने जीवन के सारे कष्टों को हमेशा के लिए दूर करने, दोगुना पुण्य फल पाने और बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा के भागीदार बनने के लिए आप आज ही इस पावन अनुष्ठान का हिस्सा बन सकते हैं। देर मत कीजिए, वैदिक टेम्पल पूजा के माध्यम से अभी अपनी सीट सुरक्षित करें।

पूजा की शुरुआत करने के लिए बस नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें और अपना पूरा नाम, गोत्र और जन्म तिथि हमारे साथ शेयर करें, ताकि काशी के इस पावन दरबार में विद्वान ब्राह्मण सीधे आपके नाम से संकल्प ले सकें।